Saturday, April 4, 2015

493. सरल गाँव (गाँव पर 10 हाइकु)

सरल गाँव (गाँव पर 10 हाइकु) 

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1.
जीवन त्वरा
बची है परम्परा,     
सरल गाँव ! 

2.
घूँघट खुला, 
मनिहार जो लाया
हरी चूड़ियाँ ! 

3.
भोर की वेला 
बनिहारी को चला   
खेत का साथी ! 

4.
पनिहारिन 
मन की बतियाती  
पोखर सुने ! 

5.
दुआ-नमस्ते
गाँव अपने रस्ते
साँझ को मिले ! 

6.
खेतों ने ओढ़ी
हरी-हरी ओढ़नी
वो इठलाए ! 

7.
असोरा ताके
कब लौटे गृहस्थ
थक हारके ! 

8.
महुआ झरे
चुपचाप से पड़े,
सब विदेश ! 

9.
उगा शहर
खंड-खंड टूटता
ग़रीब गाँव ! 

10.
बाछी रम्भाए
अम्माँ गई जो खेत
चारा चुगने ! 
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बनिहारी - खेतों में काम करना  
असोरा - ओसारा, दालान 
चुगने - एकत्र करना 
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- जेन्नी शबनम (19. 3. 2015) 

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