Tuesday, August 15, 2017

555. कैसी आज़ादी पाई (स्वतंत्रता दिवस पर 4 हाइकु)

कैसी आज़ादी पाई  
(स्वतंत्रता दिवस पर 4 हाइकु)  

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1.  
मन है क़ैदी,  
कैसी आज़ादी पाई?  
नहीं है भायी!  

2.  
मन ग़ुलाम  
सर्वत्र कोहराम,  
देश आज़ाद!  

3.  
मरता बच्चा  
मज़दूर किसान,  
कैसी आज़ादी?  

4.  
हूक उठती,  
अपने ही देश में  
हम ग़ुलाम!  

- जेन्नी शबनम (15. 8. 2017)  

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Wednesday, August 9, 2017

554. सँवार लूँ...

सँवार लूँ...  

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मन चाहता है  
एक बोरी सपनों के बीज  
मन के मरुस्थल में छिड़क दूँ  
मनचाहे सपने उगा  
ज़िन्दगी सँवार लूँ।  

- जेन्नी शबनम (9. 8. 2017) 

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Monday, August 7, 2017

553. रिश्तों की डोर (राखी पर 10 हाइकु)

रिश्तों की डोर  
(राखी पर 10 हाइकु)  

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1.  
हो गए दूर  
संबंध अनमोल  
बिके जो मोल!  

2.  
रक्षा का वादा  
याद दिलाए राखी  
बहन-भाई!  

3.  
नाता पक्का-सा  
भाई की कलाई में  
सूत कच्चा-सा!  

4.  
पवित्र धागा  
सिखाता है मर्यादा  
जोड़ता नाता!  

5.  
अपनापन  
अब भी है दिखता  
राखी का दिन!  

6.  
रिश्तों की डोर  
खोलती दरवाज़ा  
नेह का नाता!  

7.  
भाई-बहन  
भरोसे का बंधन  
अभिनंदन!  

8.  
खूब खिलती  
चमचमाती राखी  
रक्षाबंधन!  

9.  
त्योहार आया  
भईया परदेशी  
बहना रोती!  

10.  
रक्षक भाई  
बहना है पराई  
राखी बुलाई!  

- जेन्नी शबनम (7. 8. 2017)

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